Dwarka me Ghumne ki Jagah

Dwarka me Ghumne ki Jagah:- प्राचीन काल में बसी द्वारका नगरी जो भगवान कृष्ण के नाम से जानी जाती है यह स्थल गुजरात राज्य के देव भूमि द्वारका के रूप में विस्थापित है यह प्राचीन नगर गोमती नदी के दाहिने किनारे तथा इसके उत्तर में कच्छ की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर स्थापित है हम सब जानते हैं कि द्वारका नगरी एक पौराणिक युग का नगर हुआ करता था जो 1570 ईसा पूर्व में स्थापित किया गया था जो भगवान कृष्ण के वंश के शासनकाल से शुरू होकर इतिहास में सनातन धर्म और  कथाओं से जुड़े होने का दावा किया जाता है।

इतिहास कारों का मानना है कि कुछ समय पूर्व यहां पर मुसलमान और अंग्रेजों द्वारा आक्रमण करके यहां कि सारी धन संपत्ति लूट ली गई ,  इसके साथ ही मंदिर को प्रभावित करने का भी प्रयास किया गया था।  द्वारका नगरी एक पौराणिक  कथा के रूप में जानने वाला सनातन धर्म का एक प्रतीक है जो भगवान कृष्ण के नाम से भी जाना जाता है द्वारका नगरी का जिक्र पुरानी कथाओं में भी मिलता है। हम आज इस लेख में  द्वारका में घूमने के लिए वह प्रमुख जगहों का विस्तार करने वाले हैं जहां घूम कर  लुफ्त उठाया जा सकता है।

Dwarka me Ghumne ki Jagah

द्वारकाधीश मंदिर(Dwarkadhis temple): 

द्वारका में स्थित सभी मंदिरों की सूची में सबसे शीर्ष पर स्थापित द्वारकाधीश मंदिर, वह मंदिर है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का शिलान्यास खुद भगवान कृष्ण के पोते वज्रभंग ने करवाया था। लोगों का मानना है यह मंदिर भगवान कृष्ण के सभी मंदिरों में श्रेष्ठ है अगर इस मंदिर की बात करें तो इसमें 5 मंजिला इमारत जो 72 स्तंभ पर  रुकी  हुई एक अद्भुत मंदिर है। जिसपर 78 मीटर ऊंचे शिखर पर चमकीले त्रिकोणी झंडा लगा हुआ है जबकि इसके दोनों द्वारा उत्तर दिशा की ओर बने हुए हैं जिसे मोक्ष  द्वार के नाम से जाना जाता है। अगर आप इस मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुबह 6:00 से दोपहर 1:00 तक और शाम 5:00 से रात 9:30 तक दर्शन कर सकते हैं।  जहां भगवान श्री कृष्ण की विशाल  मूर्ति की स्थापना की गई है। 

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग(Nageshwar jyotirling): 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जो दुनिया भर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो द्वारका शहर से लगभग 15 किमी दूर में स्थित है यह एक महान तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता है इस मंदिर में भगवान शिव की अर्चना की जाती हैं।

स्वामीनारायण मंदिर(Swaminarayan Temple): 

स्वामीनारायण मंदिर जो भगवान विष्णु के स्वामी नारायण अवतार को समर्पित करता है यह मंदिर एक ऐसी स्थान पर विराजमान ने जो जहां का शांत माहौल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है इस मंदिर में को बनाने के लिए संगमरमर के पत्थरों का उपयोग किया गया है अगर आप इस मंदिर तक पहुंचाना चाहते हैं तो आपको द्वारकाधीश मंदिर से एक कमी और द्वारका बस स्टैंड से सिर्फ 1.5 किमी दूर जाना होगा इस मंदिर का निर्माण 1826 में की गई थी इस मंदिर को सुंदरता के परिपूर्ण के रूप में भी जाना जाता है।

गोमती घाट(Gomti ghat)

द्वारका में स्थित गोमती घाट जो गोमती नदी के संगम पर स्थित है जो अरब सागर के साथ जुड़ी हुई है माना जाता है कि इस नदी में डुबकी लगाने और द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है जिसे गोमती कुंड के नाम से भी जाना जाता है. और साथ ही पितृ दोष से बचने के लिए यहां पर पितृ अनुष्ठान भी किया जाता है साथ ही

इस गोमती कुंड में स्नान करने से सांसारिक पापों से मुक्ति मिलती है। कथाओं की माने तो इस स्नान कुंड में भगवान कृष्ण ने अनेकों बार डुबकी लगाई थी, तभी से इस कुंड को गोमती कुंड के नाम से जाना जाता है।

सुदामा सेतु(Sudama Setu):

सुदामा सेतु द्वारका के एक छोटे से नदी पर बने पुल के रूप में जाना जाता है जिसे रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड गुजरात ने पर्यटकों और इसकी सुंदरता को बनाए रखने के लिए बनाया था, इस सेतु का निर्माण 2016 में किया गया। जो गोमती नदी पर बना हुआ है जो द्वारकाधीश मंदिर के दक्षिणी पूर्व में स्थित है

 यह सेतु न  सिर्फ तीर्थ यात्रा के धार्मिक उद्देश्यों को पूरा करता है बल्कि एक किनारे से दूसरे किनारे तक जल्दी पहुंचाने का भी कार्य करता हैं  यहीं पर वह कुआं स्थित है जिसे मीठे पानी का कुआं या पांच कुआं के नाम से जाना जाता हैं। इस सेतु से अरब सागर, गोमती नदी और द्वारकाधीश मंदिर का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है।

रुक्मिणी मंदिर(Rukmini Temple):

रुक्मिणी मंदिर भगवान कृष्ण के पहली पत्नी रुक्मणी के नाम से प्रस्तुत किया गया है, इस मंदिर में आपको भगवान कृष्ण की प्रेम से जुड़ी सभी वस्तुएं प्रस्तुत किए गए है जो  भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मणी के प्रेम को प्रदर्शित करता है इतिहासकारों का मानना है कि द्वारका का रुक्मिणी मंदिर लगभग 800 साल पुराना है इसके दीवारों पर सुंदर प्रतिमा और कलाकृतियों का चित्रण  देखने को मिलता है इस मंदिर में भगवान कृष्ण की नहीं बल्कि उनकी पहली पत्नी रुक्मणी की पूजा की जाती है।

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हम आपको द्वारका से जुड़ी व प्रमुख जगहों के बारे में बताएं हैं जहां पर द्वारका में घुमा जा सकता है इन जगहों को पर्यटक बहुत ही पसंद करते हैं अगर आप भी या आपकी किसी जानकार को द्वारका नगरी को घूमना चाहते है तो उनको या आर्टिकल जरूर प्रस्तुत करें। Dwarka me Ghumne ki Jagah

 

By Meenakshi Thakur

Meenakshi Thakur, having 6 Years of Experience in Digital Marketing and Content Writing. I am free to write all types of niche content for websites and blogs. I am passionate about all of the work! I really like to explore the latest tricks in technical areas and develop case studies.

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